chini ke dam kyo badha : भारत में चीनी के दामो में इजाफा को लेकर सोशल मिडिया पर सरकार को घेर रहे है क्यों दामो में बढ़ोतरी की गयी सबका अपना -अपना तर्क है लोग खूब हल्ला कट रहे है आईये आपको बताते है किस सरकार में कितनी बार चीनी का रेट बढ़ा है
चीनी की कीमतों का इतिहास और वर्तमान स्थिति
1947 में भारत की आजादी के समय चीनी की कीमत लगभग 40 से 50 पैसे प्रति किलोग्राम (₹50.67 प्रति क्विंटल) थी, जो आज अगस्त 2026 में बढ़कर औसतन ₹55.70 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। पिछले 79 वर्षों में देश में बढ़ती जनसंख्या, मुद्रास्फीति (महंगाई), गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य (FRP) में वृद्धि और मौसम के बदलावों के कारण चीनी के दाम सैकड़ों बार बढ़े हैं।
नीचे आजादी के बाद से चीनी के दामों में आए बड़े बदलावों, प्रमुख वर्षों और उस समय की सरकारों का पूरा ब्यौरा दिया गया है:
1947 से अब तक: कब-कब बढ़े दाम और किसकी थी सरकार?
भारत में चीनी की कीमतें हर साल कम या ज्यादा होती रही हैं, लेकिन कुछ खास दशकों और वर्षों में इसमें ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दशक 1950 – 1970: शुरुआती उछाल और नियंत्रण
1947-1950 (कीमत: ~50 पैसे/किग्रा): आजादी के तुरंत बाद जवाहरलाल नेहरू (कांग्रेस) के नेतृत्व में सरकार बनी। इस दौरान चीनी की कीमतें काफी हद तक स्थिर थीं।
1966-1967 (कीमत: ~₹1.47/किग्रा): इस अवधि में देश ने भीषण सूखे का सामना किया, जिससे चीनी उत्पादन आधा रह गया और कीमतें तेजी से बढ़ीं। इस समय इंदिरा गांधी (कांग्रेस) की सरकार थी।
1970 – 1990: आंशिक नियंत्रण और महंगाई
1979-1980 (कीमत: ~₹4.50 से ₹6/किग्रा): गन्ने की भारी कमी के कारण chini ke dam kyo badha संकट पैदा हुआ। इस अवधि के दौरान पहले मोरारजी देसाई/चरण सिंह (जनता पार्टी) और बाद में इंदिरा गांधी (कांग्रेस) की सरकार थी।
1989-1990 (कीमत: ~₹9 से ₹10/किग्रा): वैश्विक बाजारों में हलचल और घरेलू मांग बढ़ने के कारण दाम बढ़े। इस समय विश्वनाथ प्रताप सिंह (जनता दल/राष्ट्रीय मोर्चा) की सरकार थी।छीने के दाम में भरी बढ़ोत्तरी
chini ke dam kyo badha 1990 – 2010: उदारीकरण और नई नीतियां
1997-1998 (कीमत: ~₹14 से ₹16/किग्रा): त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने से खुदरा कीमतों में तेजी देखी गई। इस दौरान आई.के. गुजराल और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा/NDA) की सरकार बनी।
2009-2010 (कीमत: ~₹30 से ₹40/किग्रा): मानसून खराब होने की वजह से गन्ने की पैदावार बहुत कम हुई, जिससे चीनी के दाम पहली बार ₹40 के पार चले गए। इस समय मनमोहन सिंह (कांग्रेस/UPA) की सरकार थी।
2014 – 2026: आधुनिक दौर और रिकॉर्ड स्तर
2014-2022 (कीमत: ~₹36 से ₹42/किग्रा): सरकार द्वारा चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) तय किए जाने और गन्ने की FRP बढ़ने के कारण कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई। इस दौरान नरेन्द्र मोदी (भाजपा/NDA) की सरकार रही।
अगस्त 2026 (कीमत: ~₹55 से ₹63/किग्रा): इस साल चीनी के दामों में अचानक एक महीने के भीतर 16% तक का बड़ा उछाल देखा गया है। वर्तमान में नरेन्द्र मोदी (भाजपा/NDA) की सरकार है।
चीनी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट के वर्ष
chini ke dam kyo badha आजादी के बाद कुछ ऐसे भी साल रहे जब गन्ने के बंपर उत्पादन (Surplus Production) के कारण चीनी के दामों में कमी दर्ज की गई थी: [1]
1969-70 (इंदिरा गांधी सरकार)
1977-79 (मोरारजी देसाई सरकार)
1981-83 (इंदिरा गांधी सरकार)
त्योहारों से ठीक पहले चीनी के दामों ने छुआ रिकॉर्ड स्तर
chini ke dam kyo badha देश में आगामी त्योहारी सीजन (रक्षाबंधन, गणेश उत्सव और दिवाली) से ठीक पहले चीनी की कीमतों में भारी उछाल आया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को जो चीनी ₹48.18 प्रति किलोग्राम मिल रही थी, वह 20 अगस्त तक बढ़कर औसतन ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई है। देश के कुछ खुदरा बाजारों और मंडियों में इसकी कीमत ₹63 प्रति किलोग्राम तक भी दर्ज की गई है।
कीमतें बढ़ने के 4 मुख्य कारण
उत्पादन में भारी गिरावट: चीनी सीजन के लिए शुरुआती अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन था, जो अब घटकर केवल 306 लाख मीट्रिक टन रह गया है।
फसलों को नुकसान: देश के कई प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में अत्यधिक बारिश, जलजमाव और ‘रेड रॉट’ (Red Rot) जैसी बीमारियों के कारण फसलें खराब हुई हैं।
त्योहारी मांग और जमाखोरी: त्योहारों की वजह से हलवाइयों और सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों की मांग बढ़ गई है, जिसका फायदा उठाकर कुछ व्यापारियों ने अवैध जमाखोरी शुरू कर दी।
वैश्विक कमी: वैश्विक स्तर पर भी चीनी की कमी (लगभग 33 लाख मीट्रिक टन का घाटा) चल रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी महंगी हुई है।chini ke dam kyo badha
सरकार ने उठाए सख्त कदम
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केन्द्र सरकार ने तुरंत कई बड़े फैसले लिए हैं:
स्टॉक लिमिट लागू: चीनी डीलरों के लिए अधिकतम 400 टन की स्टॉक सीमा तय कर दी गई है।
थोक उपभोक्ताओं पर नकेल: कोला, चॉकलेट और मिठाई बनाने वाले बड़े उपभोक्ताओं को 1 सितंबर से 15 दिनों से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।
बिना ड्यूटी आयात: घरेलू बाजार में सप्लाई सुधारने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्चे चीनी के शुल्क-मुक्त (Duty-Free) आयात को मंजूरी दी है।
जल्दी पेराई शुरू करने के निर्देश: मिलों को 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा गया है ताकि त्योहारों के बीच बाजार में नई चीनी आ सके। …. जब देश में सबकुछ सही चल रहा होता है तो सरकार जनता के उपर महगाई को क्यों ला देती है इसका करन शायद आप लोगों को इस लेख में समझ आ गया होगा . ...written by ..Rajesh yadav